ठूठीबारी /महराजगंज
साधन सहकारी समिति (बी-पैक्स) ठूठीबारी में खाद वितरण के दौरान कथित अनियमितताओं का मामला अब कृषि विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े करने लगा है। समिति परिसर से संदिग्ध परिस्थितियों में बाहर निकाली गई 10 बोरी यूरिया खाद बरामद होने और कृषि विभाग के जांचोपरांत बाद भी करीब एक सप्ताह बाद संदिग्ध दोषियों के खिलाफ ठोस कार्रवाई नहीं होने से किसानों में नाराजगी बढ़ती जा रही है। किसानों का आरोप है कि मामले में दोषियों पर शिकंजा कसने के बजाय पूरे प्रकरण को ठंडे बस्ते में डालने की कोशिश की जा रही है।
मामले की शुरुआत किसान छेदी लाल साहनी की शिकायत से हुई। बताया जाता है कि बी-पैक्स ठूठीबारी में खाद वितरण के दौरान समिति से बाहर संदिग्ध परिस्थितियों में रखी यूरिया की 10 बोरियां दिखाई दीं। किसान ने इसकी सूचना तत्काल उपजिलाधिकारी निचलौल सिद्धार्थ गुप्ता को दी। शिकायत को गंभीरता से लेते हुए एसडीएम के निर्देश पर कोतवाली पुलिस मौके पर पहुंची और शांतिनगर मोहल्ले से लावारिस हालत में रखी 10 बोरी यूरिया खाद बरामद कर कब्जे में ले ली।
बिना सत्यापन खाद बाहर निकालने का आरोप-
किसानों का आरोप है कि समिति से खाद वितरण के दौरान निर्धारित प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया। आरोप है कि कुछ मामलों में फिंगरप्रिंट सत्यापन के बिना ही यूरिया खाद बाहर निकाली गई। इतना ही नहीं, किसानों ने खाद को कथित रूप से नेपाल भेजे जाने की तैयारी किए जाने की आशंका भी जताई। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगी।
सीसीटीवी फुटेज ने बढ़ाई मामले की गंभीरता-
मामले में समिति परिसर में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज भी चर्चा में है। किसानों का दावा है कि फुटेज में समिति परिसर में ही कथित बिचौलियों द्वारा किसानों से निर्धारित दर से अधिक कीमत पर खाद खरीदने की गतिविधियां सामने आई हैं। यदि यह आरोप जांच में सही पाए जाते हैं तो खाद वितरण व्यवस्था में गंभीर अनियमितता का मामला बन सकता है।
सीसीटीवी के आधार पर संदिग्ध व्यक्ति से हुई थी घंटों पूछताछ-
10 बोरी यूरिया बरामदगी के मामले में पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज के आधार पर मकसूद आलम पुत्र याकूब आलम, निवासी ठूठीबारी को संदिग्ध के रूप में पूछताछ के लिए बुलाया गया था। बताया जाता है कि कोतवाली में उससे कई घंटे तक पूछताछ की गई, लेकिन पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर पुलिस ने उसे छोड़ दिया। पुलिस का कहना है कि मामले की जांच अभी जारी है और उपलब्ध साक्ष्यों एवं तथ्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। ऐसे में अब सवाल यह है कि बरामद 10 बोरी यूरिया आखिर समिति से बाहर कैसे पहुंची और इसके लिए जिम्मेदार कौन है?
एक सप्ताह बाद भी कृषि विभाग की कार्रवाई का इंतजार:
सबसे बड़ा सवाल अब कृषि विभाग की कार्रवाई को लेकर खड़ा हो गया है। खाद बरामदगी को करीब एक सप्ताह बीतने के बावजूद किसी जिम्मेदार अधिकारी, कर्मचारी अथवा अन्य व्यक्ति के खिलाफ ठोस विभागीय कार्रवाई सामने नहीं आई है। किसानों का कहना है कि यदि खाद वितरण में नियमों की अनदेखी हुई है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए। किसानों का आरोप है कि मामले में कार्रवाई नहीं होने से यह संदेश जा रहा है कि खाद वितरण व्यवस्था में कथित गड़बड़ी करने वालों को संरक्षण मिल रहा है। किसानों ने पूरे प्रकरण की निष्पक्ष एवं उच्चस्तरीय जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है।