
-लक्ष्मीपुर खुर्द बॉर्डर से बेखौफ सीमा पार हो रहा प्रतिबंधित सामान, सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवालिया निशान
– नेपाल पुलिस द्वारा प्रतिदिन बरामद की जाती है लाखों के भारतीय सामान, आखिर एसएसबी, पुलिस और कस्टम की निगरानी के बाद भी कैसे नेपाल पहुंच रहा करोड़ों का माल
महराजगंज कार्यालय/महराजगंज
भारत-नेपाल सीमा पर तस्करी के लगातार सामने आ रहे मामलों ने सीमा सुरक्षा व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। लक्ष्मीपुर खुर्द सीमा क्षेत्र में कथित तौर पर सक्रिय तस्करी नेटवर्क के जरिए लगभग 1 करोड़ के मोबाइल एसेसरीज़ का सामान सीमा पार पहुंचाए जाने के आरोपों ने अब सीमा पर 24 घंटे चौकसी का दावा करने वाली 22वीं वाहिनी एसएसबी, पुलिस और निचलौल कस्टम विभाग की निगरानी व्यवस्था को भी कठघरे में खड़ा कर दिया है।
सूत्रों के अनुसार, सोने की ईंट, नशीली दवाएं, उर्वरक, बिस्किट, चाइनीज लहसुन, कद्दू बीज और मोबाइल एसेसरीज जैसे सामानों की आवाजाही को लेकर समय-समय पर सूचनाएं सामने आती रही हैं। इसके बावजूद सवाल यह है कि यदि सीमा पर निगरानी व्यवस्था प्रभावी है तो इतनी बड़ी मात्रा में सामान आखिर सीमा पार कैसे पहुंच रहा है?
सबसे बड़ा सवाल कस्टम विभाग की भूमिका और जवाबदेही को लेकर उठ रहा है। स्थानीय स्तर पर आरोप लगाए जा रहे हैं कि सूचना मिलने के बावजूद कई मामलों में प्रभावी कार्रवाई नहीं होती। सूत्रों का दावा है कि कार्रवाई के बजाय स्टाफ की कमी समेत अन्य कारणों का हवाला दिया जाता है। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है।

दिल्ली से गोदाम तक पहुंच रहा मोबाइल का सामान?
मोबाइल एसेसरीज के कथित अवैध कारोबार को लेकर भी गंभीर सवाल हैं। आरोप है कि दिल्ली से माल पहुंचने के बाद निचलौल और ठूठीबारी क्षेत्र में बनाए गए कथित अवैध गोदामों में इसे रखा जाता है और फिर अलग-अलग रास्तों से सीमा पार भेजा जाता है। यदि यह दावा सही है तो इतनी बड़ी आपूर्ति श्रृंखला बिना स्थानीय स्तर पर किसी प्रभावी निगरानी के चल पाना अपने आप में बड़ा सवाल है।
सूचना के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं?
सबसे अहम सवाल यही है कि क्या सीमा पर तैनात एजेंसियों के बीच समन्वय की कमी है, तस्करों का नेटवर्क सुरक्षा व्यवस्था से अधिक मजबूत है या फिर कहीं न कहीं मिलीभगत का खेल चल रहा है? यदि मिलीभगत के आरोप निराधार हैं तो संबंधित विभाग को सामने आकर यह स्पष्ट करना चाहिए कि सीमा क्षेत्र में लगातार सामने आ रही तस्करी की घटनाओं को रोकने के लिए अब तक क्या ठोस कार्रवाई की गई है।
लक्ष्मीपुर खुर्द सीमा से जुड़े इलाकों में लगातार सामने आ रहे मामलों के बीच अब जरूरत केवल छोटे-छोटे तस्करों पर कार्रवाई की नहीं, बल्कि पूरे नेटवर्क, फंडिंग, गोदामों, परिवहन व्यवस्था और संरक्षण देने वाले लोगों की जांच की है।

सीमा सुरक्षा का सवाल महज कुछ बोरी सामान या मोबाइल एसेसरीज तक सीमित नहीं है। सवाल यह है कि अगर करोड़ों का माल सीमा पार जा रहा है, तो सीमा पर तैनात एसएसबी, पुलिस और कस्टम विभाग की निगरानी तंत्र आखिर कर क्या रहा है?