महराजगंज। निचलौल ब्लॉक में विज्ञापन के नाम पर कथित रूप से कुछ चुनिंदा अखबारों को धनराशि दिए जाने का मामला सामने आने के बाद पत्रकारों के बीच चर्चा तेज हो गई है। सूत्रों के मुताबिक, चयनित अखबारों को करीब 10-10 हजार रुपये की राशि दिए जाने की बात कही जा रही है। हालांकि, इस कथित भुगतान की अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि सामने नहीं आई है।
बताया जा रहा है कि कथित धनराशि के वितरण के बाद संबंधित लोगों को मामले की जानकारी अन्य पत्रकारों तक नहीं पहुंचाने की नसीहत दिए जाने की भी चर्चा है। मामला सामने आने के बाद पत्रकारों ने ब्लॉक प्रशासन की कार्यप्रणाली और विज्ञापन वितरण की प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं।
एडीओ पंचायत कार्यालय से राशि दिए जाने का दावा
सूत्रों का दावा है कि कथित रूप से यह राशि एडीओ पंचायत कार्यालय के माध्यम से वितरित की गई। हालांकि, इस दावे की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। पत्रकारों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि यदि विज्ञापन के नाम पर वास्तव में धनराशि वितरित की गई, तो इसके लिए क्या कोई निर्धारित प्रक्रिया अपनाई गई थी? भुगतान किस मद से किया गया और उसका आधिकारिक रिकॉर्ड कहां है? या मनमानी ढंग से सचिवों द्वारा ग्रामसभा स्तर से चंदा के राशि लगाकर दी गई है?
पत्रकारों के बीच बढ़ी चर्चा
मामले की जानकारी अन्य पत्रकारों तक पहुंचने के बाद यह मुद्दा चर्चा का विषय बन गया है। पत्रकारों का कहना है कि यदि सरकारी अथवा पंचायत स्तर की किसी मद या पंचायत सचिव द्वारा ग्रामसभा के चंदा से विज्ञापन के लिए भुगतान किया गया है, तो उसकी प्रक्रिया और रिकॉर्ड स्पष्ट होना चाहिए, ताकि किसी तरह की पारदर्शिता पर सवाल न उठे।
एडीओ पंचायत ने आरोपों से किया इनकार
मामले को लेकर एडीओ पंचायत गुड्डू प्रसाद ने कथित आरोपों से पल्ला झाड़ते हुए कहा कि किसी को भी विज्ञापन के नाम पर रुपये का वितरण नहीं किया गया है। उनके इस बयान के बाद अब कथित भुगतान को लेकर लगाए जा रहे दावों और उपलब्ध रिकॉर्ड की जांच को लेकर सवाल और महत्वपूर्ण हो गए हैं